Chebulic Myrobalan
हरीतकी / हरड़ / Haritaki / Harad
Terminalia chebula
श्लोक
हरीतकीनामान्याः हरितक्यभया पथ्या कायस्था पूतनामृता। हैमवती च चेतकी श्रेयसी शिवा॥
Kashaya pradhana, with multiple secondary tastes
Laghu, Ruksha
Ushna
Madhura
Tridosha balancing, especially Vata
Classical Uses
भवप्रकाश निघण्टु में इस द्रव्य का विस्तृत वर्णन नाम, गुण, रस, वीर्य, विपाक, दोषप्रभाव और पारंपरिक उपयोगों सहित मिलता है। यह प्रविष्टि प्रारम्भिक रूप से तैयार की गयी है और आगे मूल ग्रंथ-पाठानुसार क्रमशः परिष्कृत की जाएगी। पारंपरिक उपयोग: अग्नि-दीपन, पाचन-सहायता, दोष-संतुलन और रोगानुसार योगों में प्रयोग।
Summary
भवप्रकाश निघण्टु में इस द्रव्य का विस्तृत वर्णन नाम, गुण, रस, वीर्य, विपाक, दोषप्रभाव और पारंपरिक उपयोगों सहित मिलता है। यह प्रविष्टि प्रारम्भिक रूप से तैयार की गयी है और आगे मूल ग्रंथ-पाठानुसार क्रमशः परिष्कृत की जाएगी। सरल सार: यह द्रव्य दैनिक आयुर्वेदिक संदर्भ में व्यापक रूप से उपयोगी माना जाता है।
Source: Bhavaprakasha Nighantu Vol. 1 (Archive OCR extract)
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